बेरोजगार

मै एक बेरोजगार हूँ,
हाथ पैर रहते हुए भी लचार हुँ।
बड़े बुजर्गों के समाने मै बेकार हुँ,
क्योकि मै बेरोजगार हूँ।।
अब अंतिम आसरा शिर्फ केवल बेरोजगारी भत्ता है,
जिसकी निर्णयकार्ता 56 इंच सीने वाले है,
नौकरी बन गई समाजिक हैसियत का पैमाना,
नही मिलने पर दुर्लभ हो गया समाज मे जीना,
रोज पड़ोसी वाला 4—5 ताना ।।
इम्लाँयमेंट ,एक्सचेंज बन गया बेरोजगारो का सिवाला,
दर पर माथे पटक ते पटकते निकल रहा निवाला।।
गहन धुप हो या बरसात,
मै बेरोजगार करता रहता हूँ एक ही बात,
ये खुदा कही से नौकरी का बरसात कर दे।
तमाम डिग्री लिए भीख माँग रहे,
नौकरसाही के बच्चे नही परतीभा होने के बाबजुद नौकरी (पोस्ट) पर सिगरेट की धुँआ उडा रहे, और उड़ा रहे मजाक सरकारो की।
और मै गरीब बेरोजगार भटक रहे है नौकरी की परवाहो मे,,
ऐसे मे प्रभु हम गरीब बेरोजगार क्या करे,
जीवन बीता दिए नौकरी पाने मे।।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

अपहरण

” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन…

Responses

  1. बहुत सुंदर भैया आप ने हमलोगों की व्यथा को प्रकाशित किया।। ?????????????????

New Report

Close