बड़े आदमी कब कहलाओगे तुम

बड़े आदमी कब
कहलाओगे तुम
जमीं पर नजर जब
रख पाओगे तुम।
इंसानियत को
बचाकर के मन में
रख पाओगे जब
बड़े आदमी तब
कहलाओगे तुम।
जब तक न दोगे
दूजे को इज्जत
जब तक न समझोगे
इज्जत की कीमत।
जब तक रहोगे
मान-मद में अपने
बड़े आदमी क्यों
कहलाओगे तुम।
नहीं धन किसी को
बनाता बड़ा है,
वरन साफ मन ही
बनाता बड़ा है।
धनवान होकर
मदद कर न पाए
गरीबों को इंसाँ
समझ तक पाए,
समझते हो खुद को
बड़ा आदमी हूँ,
गलतफहमियां क्यों
पाले हो तुम।


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2 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 12, 2021, 9:41 am

    बहुत खूब
    कवि शतीश पाण्डेयजी ने बड़ा आदमी कौन है इस कविता में स्पष्ट किया है। इनसानियत,इंसान के प्रति दया भाव एवं परोपकार की भावना ही मनुष्य को बड़ा बनाता है। अतिसुंदर रचना

  2. Geeta kumari - January 12, 2021, 11:33 am

    “जब तक रहोगे मान-मद में अपने
    बड़े आदमी क्यों कहलाओगे तुम।
    नहीं धन किसी को बनाता बड़ा है,
    वरन साफ मन ही बनाता बड़ा है।”….
    बहुत ही सुंदर पंक्तियां हैं कवि सतीश जी , यदि इंसान का मन साफ है तो ही वह बड़ा है, धन दौलत से और किसी के बड़े पद से ही वह व्यक्ति बड़ा नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसका मन बड़ा ना हो।समाज को सुविचार प्रदान करती हुई बहुत उत्कृष्ट और प्रेरक रचना

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