भगत सिंह

जाग उठा था आशा आजादी के परवानों का,
वीर बहादुर भगत सिंह जब अंग्रेजों को ललकारा था।
कतरे कतरे खून के बूंद का यही नारा था,
हिन्द की धरती हिन्दुस्तान भाईयों को बहुत प्यारा था ‌‌।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Related Articles

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

आजादी

आजादी के इतने वर्षों बाद भी, आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।। कभी नक्सलियों, आतंकियों से आजादी, कभी रिश्वतखोरों, भ्रष्टाचारियों से आजादी ।…

Responses

New Report

Close