भूल नहीं सकते

भूल नहीं सकते
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भूल नहीं सकते वो रातें,
वो मनहूस घड़ी थी
या मेरी किस्मत फूटी,
एक नादानी से जंग छिड़ी,
जब से बिछड़े ना कभी मिले,
कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका,
खबर मैं ले लूं –
जब जब याद सताए चेहरा उसका
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**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’——


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3 Comments

  1. Pragya Shukla - October 31, 2020, 2:30 pm

    बहुत सुंदर👌👌👌

  2. Geeta kumari - October 31, 2020, 4:07 pm

    किसी दोस्त या उसकी कोई सहेली से ले लो नंबर ।
    लेकिन कविता लिखी है बहुत सुंदर👌👌

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 31, 2020, 5:37 pm

    अतिसुंदर

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