भूल

बहुत कुछ भूलने लगा हूँ मैं,
एक तुझमें ही घूमने लगा हूँ मैं।।
राही (अंजाना)


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4 Comments

  1. ज्योति कुमार - July 25, 2018, 11:05 am

    Waah kya baat hai

  2. Antariksha Saha - July 25, 2018, 11:32 am

    good one bhai

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