भौंरा

तेरी खुली जुल्फों से मैं एक सवाल करता हूँ
चाहत है तेरी कौन ये दरखास्त बारंबार करता हूँ |

लगाए थे तूने आज तक कई पहरे सोच पर मेरे
मनाया तुझे कई बार पर तू मानी न कहने पर मेरे |

जिन आंखों में शर्म थी, अब वो चेहरा भी बेपर्दा है
घुट – घुट कर जीने से अच्छा, तेरा ये नया मुखड़ा है |

आज तुझे देखकर जिंदगी जीने का मन है भौरे का
फूल खिला है सालों बाद, पुष्परस करा दे आशिक का |

चाहने लगा है तुझे इस कदर कि अब इजहार करता है
फिर से तुझे दिल से एक बार आज सलाम करता है |


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2 Comments

  1. Pragya Shukla - November 30, 2020, 9:43 pm

    तेरी खुली जुल्फों से मैं एक सवाल करता हूँ
    चाहत है तेरी कौन ये दरखास्त बारंबार करता हूँ |

    लगाए थे तूने आज तक कई पहरे सोच पर मेरे
    मनाया तुझे कई बार पर तू मानी न कहने पर मेरे |

    बहुत ही रुमानी तथा प्रेम से लबरेज अभिव्यक्ति सुंदर तथा भावपूर्ण रचना

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 1, 2020, 1:37 pm

    सुंदर

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