भ्रम

हम भ्रम पाल लेते हैं, “मैंने ही उसे बनाया है”,
कभी सोचा तूने, भू-मण्डल किसने बसाया है।
भाई ये सब कर्मानुसार ही, ब्रह्मा की माया है,
कोई सूरमा आज तक, अमर नहीं हो पाया है।।


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7 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 25, 2021, 7:34 am

    बहुत खूब
    विजेता बनने की बधाई

  2. Prabhat Pandey - February 25, 2021, 10:16 pm

    Bahut gaharai hai Bhai sahab ish rachana main, ati sundar

  3. Satish Pandey - February 28, 2021, 11:58 pm

    बहुत सुंदर व उच्चस्तरीय रचना, वाह

  4. Pragya Shukla - March 8, 2021, 1:46 pm

    बहुत अच्छा लिखते हैं आप

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