मकर संक्रान्ति की बधाई

धीमी-धीमी धूप संग में,
मीठी-मीठी खुशियां लाई।
तिल, गज्जक की खुशबू लेकर,
सर्दी में संक्रान्ति आई।
मकर संक्रान्ति मनाना है,
गंगा जी में नहाना है
गंगा जी ना जा पाओ तो,
घर में जरूर नहाना है,
सर्दी है तो हुआ करें,
ना करना कोई बहाना है।
तन में हो मस्ती मन में उमंग,
नीले अम्बर में रंग-बिरंगी उड़े पतंग।
कभी-कभी किसी की कटे पतंग,
हम भी छत पर ले कर खड़े पतंग।
ऊंची उड़ान ले पतंग आपकी,
टूटे ना डोर कभी विश्वास की।
हर पल सुख हो, हर दिन हो शांति,
सबकी ऐसी हो मकर सक्रांति।
गज्जक और पकवान है लाई,
मकर संक्रान्ति की आपको बधाई।।
_____✍️गीता


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4 Comments

  1. Satish Pandey - January 14, 2021, 11:01 am

    धीमी-धीमी धूप संग में,
    मीठी-मीठी खुशियां लाई।
    तिल, गज्जक की खुशबू लेकर,
    सर्दी में संक्रान्ति आई।
    — मकर सक्रांति पर कवि गीता जी की बहुत सुंदर और बेहतरीन रचना है यह। बहुत खूब।

  2. Geeta kumari - January 14, 2021, 11:42 am

    कविता की सुंदर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार सतीश जी , बहुत-बहुत धन्यवाद।

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 14, 2021, 2:56 pm

    बहुत खूब बहिन
    मगर चूरा दही तो भूल गई
    मकर संक्रांति संग खिचड़ी की बहुत बहुत बधाईयाँ

    • Geeta kumari - January 14, 2021, 3:38 pm

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏
      मकर सक्रांति की बहुत-बहुत बधाई

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