मगर कब तक!

मगर कब तक!

ღღ_कर तो लूँ मैं इन्तजार, मगर कब तक;
लौट आएगा बार-बार, मगर कब तक!
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उसे चाहने वालों की, कमी नहीं है दुनिया में;
याद आएगा मेरा प्यार, मगर कब तक!
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प्यार वो जिस्म से करता है, रूह से नहीं;
बिछड़कर रहेगा बे-क़रार, मगर कब तक!
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दर्द अहसास ही तो है, मर भी सकता है;
बहेंगे आँखों से आबशार, मगर कब तक!
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कहीं फिर से मोहब्बत, कर ना बैठे ‘अक्स’;
दिल पे रखता हूँ इख्तियार, मगर कब तक!!…..#अक्स
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14 Comments

  1. Kavi Manohar - August 24, 2016, 4:56 pm

    Beshumaar pyar kiya hamne har lamha unhe
    Nafrat se Gujarat hoga, magar kab tak

  2. Niranjan Pandey - August 24, 2016, 5:59 pm

    bahut sundar ji 🙂

  3. Vipendra Pal Singh - August 24, 2016, 9:01 pm

    nice

  4. Panna - August 25, 2016, 12:46 pm

    बहुत खूब

  5. Sridhar - August 25, 2016, 3:03 pm

    nice

  6. Neelam Tyagi - August 25, 2016, 3:55 pm

    behatreen ghazal sir

  7. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 7:41 pm

    वाह बहुत सुंदर

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