मजबूर खङी

कयी प्रश्न है मानस पर उभरे
यहाँ दस्तूर भी हैं कैसे-कैसे
अपने भी हैं क्यूँ पराए जैसे
माँ-पापा ने भरपूर स्नेह दिया
फिर क्यों कर खुद से दूर किया
जन्म दिया, पालन पोषण करके
क्यू किसी और के हाथों सौंप दिया
यहाँ सभी हैं अनजाने,इनके मन में कैसे झांके
सबकी है उम्मीद बङी,नन्ही गुङिया मजबूर खङी


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5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 22, 2020, 8:17 am

    बहुत खूब
    विचारणीय विषय

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 22, 2020, 8:25 am

    आखिर कौन है जो ये दस्तूर बनाया।
    पत्नी बनकर रहे घर में मजबूर बनाया।।
    मैं बापू के घर में रहूँगी भाई जाएगा ससुराल।
    ऐसे दुनिया कब बदलेगी सदा रहेगा वही हाल।।

  3. प्रतिमा चौधरी - September 23, 2020, 4:37 pm

    बहुत सुंदर रचना

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