मति

लाख मिले जो तुम्हे प्रलोभन,
हो स्थिर मन,स्थिर मति तेरी


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3 Comments

  1. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:20 pm

    Na poem na sher ye kyu daal rahe ho aap

  2. Akanksha - July 31, 2018, 11:22 pm

    Sundar

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