मत उछल

मत उछल ऊँट जैसे. मन पहाड़ के नीचे खड़ा है
कोई न कोई जरूर तुझसे बड़ा है
सबसे शक्तिमान होने के सपने न देख
हर पतंग को जमी पे आना पड़ा है

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