मदद की तरफ बढ़ना है

ठोस के साथ हमें
कुछ उदार रहना है
अपनी आदत में हमें
अब सुधार करना है।
स्वहित के साथ हमें
दूसरों के हित में भी
थोड़ा रुझान रखना है
मदद की तरफ बढ़ना है।
जिन्हें जरूरत है
उन्हें मदद करने
डगर उनकी सरल करने
हमें भी बढ़ना है,
इंसान की तरह बर्ताव कर
इंसान से प्रेम करना है
इंसानियत में रख निष्ठा
इंसान बनना है।
महान बन सकें न हम भले
मगर महानता की सीख लेकर
उसे व्यवहार में
उतारना है,
खुद के व्यक्तित्व को निखारना है।


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3 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 14, 2021, 7:48 am

    अतिसुंदर रचना

  2. Piyush Joshi - January 14, 2021, 8:22 am

    बहुत सुंदर

  3. Geeta kumari - January 14, 2021, 11:27 am

    असहायों की सहायता करने को प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की उत्कृष्ट रचना है यह।”महान बन सकें न हम भले मगर महानता की सीख लेकर उसे व्यवहार मेंउतारना है,” समाज के हर वर्ग में मदद करने की चेतना जागृत करती हुई बहुत सुन्दर पंक्तियां । उत्तम लेखन

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