ममता

ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे।
निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।।
श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे।
निश-दिन मूषक भरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै।।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Leave a Reply