ममता

एक युवती जब माँ बनती है,
ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है,
ज़ज्बात रंग -बिरंगे उसके,
बच्चे के रंग में ढलते हैं,
दिल के तारों से हो झंकृत,
लोरी की हीं गूंज निकलती,
माँ अल्फाज़ में जैसे हो,
दुनियां उसकी सिमटती चलती ,
फिर क्या, नयनों में झिलमील सपने,
आँचल में अमृत ले चलती ,
पग -पग कांटे चुनती रहती,
राहों की सारी बाधाएं,
दुआओं से हरती चलती,
हो ममता के वशीभूत बहुत,
वो जननी बन जीवन जनती है,
एक युवती जब माँ बनती है,
ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है।।


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10 Comments

  1. Yatti - May 10, 2018, 8:57 pm

    beautiful poem.

  2. e-Khaliyan - May 11, 2018, 2:27 pm

    really nice, heart touching poem

  3. Balram - May 11, 2018, 2:28 pm

    bahut hi badiya kavita, full of emotions, mom is all above always.

  4. Kiran - May 11, 2018, 2:30 pm

    no words, just superb, nice peom mam

  5. Ritu Soni - May 11, 2018, 10:34 pm

    thanks dear

  6. Ritu Soni - May 13, 2018, 8:04 pm

    thanks a lot Mithilesh ji

  7. Satish Pandey - July 31, 2020, 10:31 am

    वाह

  8. Satish Pandey - July 31, 2020, 10:31 am

    बहुत खूब

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