महफ़िल का माहौल

महफ़िल का माहौल
इस कदर न बिगाडिए
किसी पर यूॅं कीच न उछालिए
खुद के गिरेबां में
ग़र झाॅंक सको तो ठीक
वरना किसी और पर यूॅं,
तोहमत तो ना लगाइए l
ताप हमारे अंदर भी हैं
आपके भीतर भी होगा l
सरे आम हमें,
यूॅं ना आजमाइए l
जाइए पहले देख कर आइए आईना,
फिर किसी और पर तोहमत लगाइए॥
______✍ गीता

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Responses

  1. बहुत सटीक कथन व सुन्दर रचना, सभी को केवल साहित्य सृजन की ओर बढ़ना चाहिए।

    1. कविता की इतनी सुंदर और सटीक समीक्षा करने के लिए और कविता का मर्म समझने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी हार्दिक आभार

  2. कवि गीता जी की बहुत सुन्दर, और सटीक रचना है यह। लेखनी का अभिवादन। भाव, भाषा व शिल्प का बेहतरीन तालमेल

    1. कविता की सुंदर और सटीक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, बहुत-बहुत आभार, अभिवादन सर

  3. महफ़िल का माहौल
    इस कदर न बिगाडिए
    किसी पर यूॅं कीच न उछालिए
    खुद के गिरेबां में
    ग़र झाॅंक सको तो ठीक
    वरना किसी और पर यूॅं,
    तोहमत तो ना लगाइए l

    उत्तम लेखन सही बात कही
    खुद के गिरेबान में झांकने की आवश्यकता होती है दूसरे पर उंगली उठाने से पहले…

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