माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो

माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,
मुझे जीवन का मतलब बतला दो,
कहती हो मेरे जिगर का टुकड़ा हो
पापा की लाडली हो
फिर पराये धन का मतलब समझा दो,
माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,
एक नह़ि दो घरों की रोशनी हूँ
कहती हो इस जहाँ कि रचियता हो
फिर च़िराग का मतलब समझा दो,
माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,
बेटी,बहना,बहु,दादी,नानी,माँ
जाने कितने नाम ह़ै माँ
बस मुझे मेरे नाम से अवगत् करा दो,
माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,
पंखों से नही हौसलोँ से उड़ती हूँ,
एक पल में दुनिया जीत लेने का जज्ब़ा रखती हूँ,
हा माँ मुझे फिर घुघ़ट का अर्थ समझा दो,
माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,
गिरने से पहले सम्भंला सिखा दो,
मुझे मुझ से मुखाँतिब करा दो,
मेरी खुद से जान पहचान करा दो,
माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,
मुझे जीवन का मतलब बतला दो,
माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो,

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7 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - January 18, 2019, 10:28 pm

    सुंदर रचना

  2. राही अंजाना - January 19, 2019, 9:46 pm

    बढ़िया

  3. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 11:01 pm

    Good

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