माँ

माँ न होती,
तो यह श्रष्टि न होती

पृथ्वी है माँ,
प्राण है माँ

उचित अनुचित की ,
द्रष्टि है माँ

-विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

पिता

माँ

माँ

माँ

माँ

2 Comments

  1. Vinita Shrivastava - July 18, 2018, 10:51 pm

    Aabhar

  2. Akanksha - July 22, 2018, 12:07 pm

    Kya bat h

Leave a Reply