माँ

माँ का प्यार है बड़ा निराला

मिले उसे जो किस्मत वाला

माँ ममता करुणामय सागर

धन्य हुआ जग तुझको पाकर

वेद पुराणों की गाथा में

तुझे मैं देखूं गौ माता में

गंगा में भी तेरा प्यार

बहती रहती अमृतधार

माँ के धैर्य की थाह नहीं

कष्ट सहे पर आह नहीं

कष्टों से तू हमें बचाए

जब अपना आँचल लहराए

आंखों में है स्नेह पताका

संजीवनी स्पर्श माँ का

मृतक में भी डाले जान

ऐसे हैं लाखों गुण गान

शब्दों की बन्दिश ना होती

करके भावों की अभिव्यक्ति

माँ पर लिख दूं ग्रंथ हजार

अफसोस, कम पड़ जाएगा शब्द संसार

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. माँ पर लिखी बहुत सुन्दर रचना, सच है माँ पर जितना भी लिखा जाए उतना कम है

  2. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति
    *मां*ममता करुणामय सागर
    धन्य हुआ जग तुझको पाकर….🙏

New Report

Close