मां शारदे स्तुति

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वीणावादिनी मां पद्मनिलया,
ज्ञान का दीप जला देना,
तिमिर मिटे अज्ञानता का,
मां पथ आलोकित कर देना।
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श्वेतवस्त्रा मां सुरवंदिता,
आन कंठ सुर भर देना,
शीश नवाऊं तेरे चरणों में,
वरद हस्त सिर रख देना।
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रहूं सदा कर्तव्य पथअग्रसर,
मां सत्य मार्ग दिखला देना,
विनती सुनो हे! मातु हमारी,
साहस,शील हिय भर देना।
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स्वरचित मौलिक रचना
✍️…अमिता गुप्ता

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Responses

      1. बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां लिखी हैं आपने अमिता जी

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