मुक्तक

कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है!
हरवक्त तेरे दर्द़ से खुद को सताना है!
मुमकिन नहीं है रोकना नुमाइश जख्मों की,
हर शाम तेरी याद में खुद को जलाना है!

मुक्तककार- #महादेव’


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Lives in Varanasi, India

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3 Comments

  1. Anirudh sethi - October 6, 2016, 11:01 am

    very nice

  2. Kanchan Dwivedi - March 8, 2020, 4:56 am

    Very nice

  3. Pragya Shukla - April 8, 2021, 11:08 pm

    Khoobsoorat line

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