मुक्तक

मेरे दर्द का आलम गुजर गया है!
तेरी बेरुखी का जख्म भर गया है!
कोई नहीं है मंजिल न राह कोई,
चाहतों का हर मंजर बिखर गया है!

#महादेव_की_कविताऐं'(21)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

5 Comments

  1. Akanksha Malhotra - January 19, 2017, 9:53 am

    आपकी कविता पढकर
    मन मेरा और निखर गया है!

  2. देव कुमार - January 19, 2017, 11:10 am

    Bahut KHoob Mahadev Ji

Leave a Reply