मुक्तक

अब चाहतों के हमको नजारे नहीं मिलते!
अब ख्वाहिशों के हमको इशारे नहीं मिलते!
हर वक्त ढूंढ लेती है तन्हाई दर्द की,
अब हौसलों के हमको सहारे नहीं मिलते!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय


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Lives in Varanasi, India

4 Comments

  1. Neha - May 30, 2018, 9:00 pm

    Very nice sir

  2. राही अंजाना - June 20, 2018, 11:43 pm

    वाह

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 10:03 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

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