मुक्तक

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ।
अपनी तमन्नाओं की ज़ागीर से मिलता हूँ।
नज़रों को घेर लेता है यादों का समन्दर-
चाहत की लिपटी हुई जंजीर से मिलता हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

मुक्तक

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ! तेरी तमन्नाओं की जागीर से मिलता हूँ! नजरों को घेर लेता है यादों का समन्दर, चाहत की…

Responses

New Report

Close