मुक्तक

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ? मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन-…

“मैं स्त्री हूं”

सृष्टि कल्याण को कालकूट पिया था शिव ने, मैं भी जन्म से मृत्यु तक कालकूट ही पीती हूं।                                                    मैं स्त्री हूं।                                              (कालकूट –…

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