मुक्तक

अनजाने से संसार में खुशीयों को लो बटोर
अपने पराये में ब्यर्थ ना करो रिस्ते का डोर
समय बहुत मुल्यवान है करते रहो तुम प्रेम
सहज ही उत्पत्ति होगी भाई बंधू का प्रेम

महेश गुप्ता जौनपुरी


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

6 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 9, 2019, 6:06 pm

    बहुत खूब

  2. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 7:01 pm

    Wah

  3. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 7:56 am

    Good one

  4. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 10:11 pm

    Nkce

  5. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 10:11 pm

    👍

Leave a Reply