मुक्तक

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव ,
नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव ,
रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव ,
मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव ,

महेश गुप्ता जौनपुरी

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6 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 23, 2019, 7:15 pm

    वाह बहुत सुंदर

  2. NIMISHA SINGHAL - September 23, 2019, 9:19 pm

    Gao,🐂🐮👌👌

  3. Poonam singh - September 23, 2019, 9:31 pm

    Nice

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