मुक्तक

तेरे सिवा कुछ मुझे नज़र आता नहीं है!

मेरा सफर यादों का गुजर पाता नहीं है!

राहें खींच लेती हैं इरादों की इसतरह,

ख्वाबे-जुत्सजू तेरा मुकर पाता नहीं है!

Composed By #महादेव

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