मुझमें गुम तुम

प्यार होता ही है गहराइयों में,
वरना गहरे पानी में कौन डूबकी लगाता है।
तेरी तीखी निगाहों का मिलना,
सर्द रातों में भी आतिश मुझे बनाता है।
याद नहीं रहता उस वक्त कुछ भी,
जब तेरा चेहरा सामने ठहर जाता है।
आंख भर देखना तेरा मुझको,
इस कायनात में सबसे सुंदर बनाता है।
जब जखीरा तेरी यादों का घेरता मुझको,
भरी महफिल में भी तन्हा मुझे कर जाता है।
रफ्ता रफ्ता हो गए मुझ में तुम गुम,
तुम हो या मैं समझ नहीं आता।
निमिषा सिंघल


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10 Comments

  1. Poonam singh - October 18, 2019, 1:19 pm

    Nice

  2. nitu kandera - October 19, 2019, 7:25 am

    Wah

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