मुसीबत आई

जब मुसीबत आई तो मैंने ये नहीं सोंचा
कि ‘अब कौन काम आएगा’
बल्कि यह सोंचा कि देखती हूँ
अब कौन साथ छोंड़ जाएगा..

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Responses

  1. कवि प्रज्ञा जी की कविता में बहुत ही गहराई और सच्चाई छिपी हुई है
    मुसीबत में कोई साथ छोड़ दे तो कैसा अपनापन ।
    वाह ,बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।

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