मुस्कानों के पीछे

रोता हुआ ही मिले, हर टूटा इंसान
हमें भी गम छिपाने आते हैं, मुस्कानों के पीछे…

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

    1. समीक्षा और सराहना हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏
      उत्साह वर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार

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