मुस्कान बांधे जा रही है

तेरी मुस्कान बांधे जा रही है , हमें ………..
जिंदगी की डोर बनकर
रंगीन सुतली की तरह,
लिबास की बैल्ट समझ ले
या फिर आजकल का इलास्टिक
रम गई है उस तरह तू
जिस तरह से जिंदगी में
घुलमिल गया है प्लास्टिक,
………. डा0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत


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4 Comments

  1. Geeta kumari - January 29, 2021, 10:26 am

    बहुत खूब, कवि सतीश जी की लाजवाब अभिव्यक्ति

  2. Rishi Kumar - January 29, 2021, 12:21 pm

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  3. Suman Kumari - January 30, 2021, 12:31 am

    सुंदर

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 30, 2021, 9:04 pm

    अतिसुंदर अभिव्यक्ति

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