मुस्कुराना

मुस्कुरा कर बोलना,
इन्सानियत का जेवर है।
यूं तेवर न दिखलाया करो,
हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका,
यू इंतजार न करवाया करो।
माना गुस्से में लगते हो,
बहुत ख़ूबसूरत तुम
पर हर समय गुस्से में न आया करो।
बिन खता के ही खतावार से रहते हैं हम,
यूं न हमें डराया करो।
एक दिन छोड़ देंगे हम ये जहां,
फिर ढूंढोगे तुम हमें कहां।
तो मुस्कुराओ जी खोलकर,
कह दो जो कहना है बोलकर।
हमको यूं न सताया करो,
मुस्कुराना इन्सानियत का जेवर है।
यूं तेवर न दिखलाया करो।।
____✍️गीता


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12 Comments

  1. Satish Pandey - February 28, 2021, 2:53 pm

    मुस्कुरा कर बोलना,
    इन्सानियत का जेवर है।
    यूं तेवर न दिखलाया करो,
    हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका,
    – रोमानियत अंदाज की बहुत खूबसूरत पंक्तियां। मुस्कुराने को प्रेरित करती शानदार रचना। बेहतरीन शिल्प, खूबसूरत भाव।

    • Geeta kumari - February 28, 2021, 5:34 pm

      इतनी सुन्दर और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत
      बहुत धन्यवाद सतीश जी।आपकी समीक्षा वास्तव में कवि हृदय में उत्साह का संचार करती हैं, हार्दिक आभार सर

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - March 1, 2021, 12:11 am

    अतिसुंदर भाव

  3. Rakesh Saxena - March 1, 2021, 12:32 pm

    मुस्कराहट दिलों को जोड़ती है,
    क्रोध रिश्ते, इज्जत और दिल सबकुछ खत्म कर देता है
    सुंदर रचना

  4. Anu Somayajula - March 1, 2021, 11:22 pm

    सुंदर रचना गीताजी। वैसे देखा जाए तो सही मायने में मुस्कुराहट की कीमत तेवर झेलने बाद ही तो समझ आती है !

    • Geeta kumari - March 2, 2021, 8:04 am

      समीक्षा हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद अनु जी

  5. Satish Pandey - March 2, 2021, 8:36 am

    सर्वश्रेष्ठ कवि, सर्वश्रेष्ठ आलोचक और सर्वश्रेष्ठ सदस्य सम्मान की बहुत बहुत बधाई गीता जी।

  6. Pragya Shukla - March 8, 2021, 1:40 pm

    Nice

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