मुहब्बत

मुहब्बत इस जिंदगी की
खूबसूरती है,
बिना मुहब्बत के
सब कुछ शून्य सा ही है।
मुहब्बत जीने का जरिया है
मुहब्बत निर्मल सी दरिया है
मुहब्बत जीवन भवन स्तम्भ की
मजबूत सरिया है।


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11 Comments

  1. Geeta kumari - September 27, 2020, 3:43 pm

    वाह सर, जीने का जरिया, निर्मल सा दरिया…सुंदर शब्दों का चयन और लय बद्ध शैली आपके काव्य की विशेषता रही है । उपमा अलंकार से सुसज्जित बहुत ही सुन्दर कविता है सतीश जी ।कवि की लेखन शैली को अभिवादन ।

    • Satish Pandey - September 27, 2020, 6:44 pm

      सादर धन्यवाद गीता जी, आपकी समीक्षा शक्ति अदभुत है। सादर अभिवादन

  2. Chetna jankalyan Avam sanskritik utthan samiti - September 27, 2020, 8:44 pm

    Bahut khoob

  3. Devi Kamla - September 27, 2020, 8:49 pm

    मुहब्बत जीने का जरिया है
    वाह वाह पाण्डेय जी

  4. MS Lohaghat - September 30, 2020, 8:09 am

    सच्ची बात है

  5. Piyush Joshi - September 30, 2020, 8:11 am

    बहुत खूब

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