मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी

वफ़ा कीजिए खुद वफ़ा ही मिलेगी,
धोखे से बस बेवफाई मिलेगी।
मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी,
दिल ए गंदगी को , जगह ना मिलेगी।
सड़क धूल से, इस कदर जब भरी हो,
पांवों को निर्मल, वफ़ा ना मिलेगी।
सदा कोसते हम रहे दुश्मनों को
मगर इससे कोई दिशा ना मिलेगी।
— डॉ0 सतीश पाण्डेय


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4 Comments

  1. Devi Kamla - October 16, 2020, 11:08 am

    वाह वाह, बहुत खूब

  2. MS Lohaghat - October 16, 2020, 1:46 pm

    बहुत खूब कवित्त्व

  3. Geeta kumari - October 16, 2020, 2:21 pm

    बहुत सुंदर रचना,अति सुंदर भाव एवम् प्रस्तुति

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 17, 2020, 8:38 pm

    बहुत खूब

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