मृत्यु तक क्यों कोई सीड़ी ना जाती !!!

क्यों हो जाते ख्वाब हैं झूठे
मिट जाते सब उजियारे
चहुँ ओर फैल जाता है अंधियारा
उजड़े-उजड़े गलियारे
पुष्पों की सुगंध खो जाती
निर्मल पावन क्यों गर्म हो जाती
पानी की मीठी-मीठी धारे
विपरीत दिशा क्यों बह जाती
यह मर्म तो कोई ना जाना
मृत्यु तक क्यों कोई सीड़ी ना जाती!!!

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