मेरा मध्यप्रदेश

जहां स्वयं भूतनाथ विराजे,महांकाल के वेश में,
कण-कण में सुंदरता झलके मेरे मध्यप्रदेश में,
जीवनदायिनी रेवा बहती,विंध्याचल विराट है;
रत्न अमोल भरे अपार है, यह खनिज सम्राट है।
भीमबेटका खजुराहो से,संस्कृति की पहचान है;
मोक्षदायिनी क्षिप्रा रूपी,मिला हमें वरदान है;
जहां मन मोहिनी सुगंध भरी हो,
चंदन के अवशेष में;
महाकाल रक्षक है जिसके,आइए इस प्रदेश में।

कवि:- सुरेन्द्र मेवाड़ा ‘सरेश’
आयु:- 14 वर्ष

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