मेरी कविता..

सावन पर कविताओं की बहार छाई है
मेरी कविता अभी तो ना तैयार होके आई है।
कहती है थोड़ा और बन संवर लूं …
अच्छी सी दिखूंगी थोड़ा और निखर लूं ।
सब को लिखते देख ,मेरा मन मचल उठा,
कविता बोली रुक जा, अभी बहुत रात हो आई है ।
………….✍️गीता…..

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Responses

  1. अच्छी-अच्छी कविताओं की बहार आने पर कवि मन का मचलना लाजमी है। यही सच्चे कवि की पहचान भी है। बहुत खूब।

    1. कवियित्री के भाव समझने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏….
      सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार ..

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