मेरी हिंदी

दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है,
ये हिंदी ही हम सबको अपना बना लेती है।।

हो जाए गर नाराज़गी तो मस्का लगा देती है,
साथी हो या मांझी सबको रस्ता बता देती है,

पढ़े लिखे और अनपढ़ का फर्क दिखा देती है,
भारत माँ का परचम ऊँचा चस्पा करा देती है।।

राही अंजाना

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

8 Comments

  1. Archana Verma - September 14, 2019, 8:18 pm

    nice

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 14, 2019, 9:01 pm

    वाह बहुत बढ़िया

  3. ashmita - September 15, 2019, 6:23 am

    Nice

  4. Deovrat Sharma - September 15, 2019, 9:28 am

    सुंदर रचना

  5. राम नरेशपुरवाला - September 15, 2019, 11:46 am

    Kya baat h

  6. Poonam singh - September 15, 2019, 12:31 pm

    Nice

  7. NIMISHA SINGHAL - September 16, 2019, 1:31 pm

    Nice

Leave a Reply