मेहनत के रंग

वो बूढ़ी थी, गरीब थी
भीख नहीं मांगी थी उसने,
पैन बेच रही थी राहों में
मेहनत का खाने की ठानी,
मेहनत का ही खाती खाना
मेहनत का ही पीती पानी।
कहती थी यह पैन नहीं है,
यह तो है किस्मत तुम्हारी
खूब पढ़ना लिखना बच्चों
बदलेगी तकदीर तुम्हारी।
बदलेगा फिर भारत सारा,
बदलेगी तस्वीर हमारी।।
____✍️गीता


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

6 Comments

  1. Piyush Joshi - February 21, 2021, 11:07 am

    वाह बहुत खूब

  2. Satish Pandey - February 22, 2021, 2:24 pm

    खूब पढ़ना लिखना बच्चों
    बदलेगी तकदीर तुम्हारी।
    बदलेगा फिर भारत सारा,
    बदलेगी तस्वीर हमारी।।
    ——— वाह क्या बात है, आपकी लेखनी में अद्भुत प्रेरणा शक्ति विद्यमान है। जो भी लिख रही हैं लाजवाब लिख रही हैं। भाषा, भाव, संवेदना सभी कुछ उच्चस्तरीय है। जय हो

  3. Geeta kumari - February 22, 2021, 6:18 pm

    आपकी दी हुई समीक्षा में अद्भुत प्रेरणा और उत्साह वर्धन है सतीश जी ,अभिवादन सर

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 22, 2021, 7:33 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • Geeta kumari - February 22, 2021, 7:36 pm

      सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार भाई जी🙏

Leave a Reply