मोहब्बत के बदलें मोहब्बत नहीं है।

मोहब्बत के बदलें मोहब्बत नहीं है।
हक़ीक़त के बदले हक़ीक़त नहीं है।।
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बहुत मर्तबा हम भी उलझें थे भँवर में।
पहले सी अपनी अब तबियत नहीं है।।
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सुबह शाम मेरी थे जो फ़िक्र करने वाले।
अब जुबाँ पे उन्हीं के हिदायत नहीं है।।
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मुझे तुम पढ़ो जो गिला कुछ न करना।
तज़ुर्बा है ये सब कोई शिकायत नहीं है।।
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दिलों से कभी तुम किसी के न खेलों।
ये टूटे अगर जो कही भी मरम्मत नहीं है।।
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सफर में है साहिल तुफानों से कह दो।
वो रोकेंगे हमकों ऐसी जुर्रत नहीं है।।
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3 Comments

  1. Panna - November 19, 2016, 8:21 pm

    बदले हम ऐसे जमाने की हवा में
    तुम अब तुम नहीं हो, हम, हम नही हैं

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