मोहलत

थोड़ी मोहलत मांगता हु रब
बस एक बार उनका दीदार हो जाए
फासले जो फैसलों की वजह से थे
बस उस पर सुलह हो जाए

यूँ रूठना भी कुछ होता है क्या
एक बार मुरना तोह बनता है ना यार
रो तू भी रही थी मैं भी
एक बार मिलाना तो बनता है ना यार

ए खुदा बोल तेरी रज़ा है क्या
इन दूरियों की वजह है क्या
मांग ता कुछ नहीं तुझसे
बस इस बेरुखी की खता है क्या


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11 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 31, 2020, 10:32 pm

    बहुत ही सुंदर

  2. Antariksha Saha - July 31, 2020, 10:36 pm

    आभार आपका

  3. Satish Pandey - July 31, 2020, 11:13 pm

    **एक बार मिलाना तो बनता है ना यार** वाह वाह, बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

  4. Abhishek kumar - July 31, 2020, 11:21 pm

    हूँ।
    एक बार मुड़ना।
    कवि ने प्रेम में हुए बिछोह की वेदना से व्यथित मनुष्य की भावना को उजागर किया है।

  5. Indu Pandey - August 1, 2020, 9:57 am

    अति सुन्दर

  6. Geeta kumari - August 1, 2020, 11:21 am

    मन के विचारों को व्यक्त करती सुंदर रचना

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