यश-अपयश में एक समान

सबसे गहरी यह बात है मन
तूने स्थिर रहना होगा,
कभी कहीं, कभी कहीं,
ऐसे न तुझे बहना होगा।
एक लीक एक धारा,
एक मार्ग हो साधन एक
एक नजर रख मंजिल पर
ऐसे तुझको बढ़ना होगा।
न क्रोध, न दर्द, न उलझन हो,
उत्साह सजा सा हरदम हो,
रह तू एक समान सदा मन,
लाभ अधिक हो या कम हो।
यश-अपयश में एक समान
गाली हो या हो गुणगान,
कभी न विचलित हो तू मन,
पथ रोशन हो या फिर तम हो।


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13 Comments

  1. Rajeev Ranjan - April 8, 2021, 3:10 am

    बहुत ही सुन्दर पंक्तियां सतीस जी

    उत्साह सजा सा हरदम हो,
    रह तू एक समान सदा मन,
    लाभ अधिक हो या कम हो।
    यश-अपयश में एक समान
    गाली हो या हो गुणगान,
    कभी न विचलित हो तू मन,
    पथ रोशन हो या फिर तम हो।

  2. Piyush Joshi - April 8, 2021, 7:13 am

    सर, आपकी कविताएं बहुत सुंदर हैं, एक स्थिर मन के कवि द्वारा समष्टि पर आधारित कविताएं हैं, इनमें न किसी के प्रति ठेस है न मन की अस्थिरता है, न इधर इधर की बातें ह
    हैं। बहुत सुंदर रचना

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 8, 2021, 9:21 am

    अतिसुंदर रचना

  4. Deepa Sharma - April 8, 2021, 12:17 pm

    कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत सुन्दर कविता है

    • Satish Pandey - April 8, 2021, 4:24 pm

      आपकी उत्साहवर्धक समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु सादर अभिवादन

  5. Geeta kumari - April 8, 2021, 3:53 pm

    सबसे गहरी यह बात है मन
    तूने स्थिर रहना होगा,
    कभी कहीं, कभी कहीं,
    ऐसे न तुझे बहना होगा।
    __________ स्थिर मन रखने का सुंदर संदेश देती हुई श्रेष्ठ कवि सतीश जी की एक श्रेष्ठ रचना। आपकी लेखनी निर्बाध गति से आगे बढ़ती है और प्रखरता लिए हुए, समाज को एक सुंदर साहित्य प्रदान करती है। अति उत्तम लेखन

    • Satish Pandey - April 8, 2021, 4:25 pm

      एक श्रेष्ठ समीक्षक द्वारा की गई विलक्षण समीक्षा से कवि को लेखन की ऊर्जा प्राप्त होती है। बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

  6. Arvind Kumar - April 8, 2021, 7:07 pm

    वाह, पाण्डेय जी अति उत्तम लेखन

  7. Pragya Shukla - April 8, 2021, 11:00 pm

    बहुत खूब

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