यही तो है ज़िन्दगी

कभी धूप है खुशियों की,
कभी दर्द की छांव
कभी जीत की आशा,
कभी हार के थक गए पांव
बस, यही तो है ज़िन्दगी..

*****✍️गीता


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7 Comments

  1. Virendra sen - November 18, 2020, 3:43 pm

    बिल्कुल सही कहा आपने

  2. Pragya Shukla - November 18, 2020, 3:54 pm

    बिल्कुल,
    हर कोई परेशान है इन सवालों से
    कहां कोई बच पाया है
    गमों और खुशियों की धूप छांव से

  3. Geeta kumari - November 18, 2020, 4:14 pm

    इस समीक्षा गत टिप्पणी हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 21, 2020, 8:39 am

    सुंदर

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