यादें

बीते कल की परछाई है और तुम्हारी यादें हैं
मैं हूँ, मेरी तन्हाई है और तुम्हारी यादें हैं..!!

सर्द अंधेरी इन रातों में थोड़ी सी मदहोशी है
टूटी सी इक अंगड़ाई है और तुम्हारी यादें हैं!!

छूके तुमको आने वाली इन मदमस्त हवाओं ने
भीनी खुशबू बिखराई है और तुम्हारी यादें हैं…!!

ख्वाब तुम्हारे देखने वाली चंचल सी इन आँखों मे
दर्द की बदली घिर आई है और तुम्हारी यादें हैं.!!

©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’
(21/12/2020)


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8 Comments

  1. Geeta kumari - December 21, 2020, 9:25 pm

    “छूके तुमको आने वाली इन मदमस्त हवाओं ने भीनी खुशबू बिखराई है और तुम्हारी यादें हैं…!!”
    वाह ,किसी की याद में लिखी गई बहुत ही
    खूबसूरत पंक्तियां हैं अनु जी । लाजवाब अभिव्यक्ति

    • अनुवाद - December 21, 2020, 10:47 pm

      प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद मैंम 🙂🙂

  2. Sandeep Kala - December 21, 2020, 9:43 pm

    वास्तविक तथा यथार्थ चित्रण

  3. Virendra sen - December 21, 2020, 10:07 pm

    यथार्थ चित्रण

  4. अनुवाद - December 21, 2020, 10:47 pm

    धन्यवाद सर

  5. Pragya Shukla - December 22, 2020, 12:11 am

    यादों पर बहुत ही सुंदर कविता

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 24, 2020, 3:11 pm

    बहुत खूब

  7. vikash kumar - February 12, 2021, 6:50 pm

    Jay ram jee ki.

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