यादें

साज़
……..
बुझती… बंद होती.. यादो की मोमबत्तीयाँ….
दे जाती हैं याद… आज भी मधुरिमा।
याद रह जाते हैं …कुछ शब्द…गूंज बनके…
कहकहे हवाओं में गूँजते हैं साज़ बनके।।
निमिषा
…….।


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15 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 13, 2019, 9:20 pm

    वाह

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 13, 2019, 10:44 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  3. Ashmita Sinha - September 14, 2019, 12:08 am

    Nice

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 14, 2019, 1:52 pm

    वाह बहुत बढ़िया

  5. देवेश साखरे 'देव' - September 14, 2019, 3:07 pm

    सुंदर रचना

  6. Poonam singh - September 14, 2019, 3:49 pm

    Nice

  7. राम नरेशपुरवाला - September 15, 2019, 11:48 am

    Nice

  8. Abhishek kumar - December 24, 2019, 8:19 am

    Nice

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