यादों की बारात

मुझे ठुकरा कर काश तुम अपना जीवन संवार लेते।
तेरी बेवफ़ाई को ही हम अनमोल तोहफ़ा समझ लेते।।
मुझे यह दु:ख नहीं कि तुम मेरे हमसफ़र नहीं बन पाए।
दु:ख तो इस बात की है हम एक हो के भी एक हो न पाए।।
जीवन में हर शख्स को मुकम्मल प्यार नहीं मिलता।।
फिर भी यादों की बारात में यादों के फूल है खिलता।।


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 20, 2020, 7:13 pm

    बहुत खूब

  2. Satish Pandey - December 20, 2020, 9:08 pm

    सुन्दर रचना

  3. Geeta kumari - December 20, 2020, 9:58 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. Pragya Shukla - December 21, 2020, 7:11 pm

    हृदय की वेदना को शब्दों से अभिव्यक्त करने की सफल चेष्टा की है अमित सर ने जो काबिलेतारीफ है

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