ये कैसा दौर है

ये कैसा दौर है जहाँ
विश्वास का भी कारोवार है
हैसियत का पता नहीं पर
पहुंचने पर बनता कर्जदार है

एक समय था सबसे ज्यादा भरोसा
डॉक्टर पर ही होता था
भगवान से भी कहीं
पहले स्थान उसका होता था

अब तो वो ही सबसे ज्यादा
लोगों को क़तर रहे
हर दिन ही इंसान के निगाहों में
शूल से हैं चुभ रहे

उम्र सब की लगभग इतनी
फिर भी इतना लालच हैं क्यों
इंसान अपनी आदतों का
ऐसे शिकार हुआ हैं क्यों

पैसे की भूख ऐसी इतनी
किसी भी युग में न थी
व्यवसाय के लिए भी
उतनी आवश्यक वस्तु न थी

मुफ्त न मिले सब कुछ
श्रम तो लगता ही हैं
पर किसी वस्तु की कीमत
का कोई सीमा रहता हैं

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

Responses

  1. यथार्थ चित्रण किया है, आपने बहुत सुंदर सृजन सर🙏🙏

New Report

Close