ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं…!!!

रात को ये कैसे-कैसे
ख्वाब आते हैं !
तेरे खयाल
मेरी रूह को छू जाते हैं
बिस्तर ये जाने क्यूँ
काटने को दौड़ता है !
तेरी यादों से मेरा तन-मन पिघलता है
जागती हूँ रातभर और दिल मचलता है
लोग मुझे आजकल पागल बुलाते हैं
रात को ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं !


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6 Comments

  1. vivek singhal - November 19, 2020, 10:51 am

    लाजवाब अभिव्यक्ति

  2. Geeta kumari - November 19, 2020, 2:43 pm

    वियोग पक्ष की सुंदर अभिव्यक्ति

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 21, 2020, 8:36 am

    अतिसुंदर भाव

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