रंग महोत्सव भांग महोत्सव

रंग के बहाने पी को आज छुआ जाए
सखी!
चलो भंग के बहाने कुछ बहक – बहक जाएं
सखी ! बहकने -महकने का आज लुफ्त उठाएं
सखी !
रंग के बहाने थोड़ा आज जिया जाए
सखी !
निमिषा सिंघल

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11 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - October 1, 2019, 7:49 am

    वाह

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 1, 2019, 9:29 am

    वाह बहुत सुंदर

  3. Poonam singh - October 1, 2019, 3:25 pm

    Nice

  4. nitu kandera - October 4, 2019, 10:58 am

    Nice

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